सरकारी स्कूलों में मंत्र-पाठ अनिवार्य करने के आदेश पर सियासत तेज, कांग्रेस ने जताया विरोध
शिक्षा विभाग के नए निर्देशों को लेकर उठे सवाल, कांग्रेस ने कहा- सरकारी स्कूलों पर विचारधारा थोपने की कोशिश
रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में प्रार्थना, मंत्र-पाठ और अन्य गतिविधियों को अनिवार्य किए जाने के स्कूल शिक्षा विभाग के आदेश पर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। कांग्रेस ने इस फैसले का विरोध करते हुए इसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की विचारधारा को सरकारी स्कूलों में लागू करने का प्रयास बताया है।
कांग्रेस के प्रदेश संचार विभाग प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि स्कूल शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों के लिए दिन में अलग-अलग समय पर विभिन्न मंत्रों और धार्मिक गतिविधियों को अनिवार्य कर दिया है, जिस पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
कांग्रेस ने उठाए कई सवाल
सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि विभागीय आदेश के तहत भोजन मंत्र, गुरु मंत्र, गायत्री मंत्र और शांति मंत्र जैसे पाठ अनिवार्य किए गए हैं। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों में इस प्रकार की अनिवार्यता की आवश्यकता क्यों है।
उन्होंने कहा कि क्या सरकार सरकारी स्कूलों को सरस्वती शिशु मंदिर की तर्ज पर संचालित करना चाहती है और क्या आरएसएस के विचारों को सरकारी शिक्षा व्यवस्था में लागू करने की कोशिश की जा रही है।
सभी धर्मों के बच्चे पढ़ते हैं सरकारी स्कूलों में
कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकारी विद्यालय किसी एक धर्म, समुदाय या विचारधारा के नहीं हैं। यहां सभी वर्गों और धर्मों के बच्चे अध्ययन करते हैं।
उन्होंने कहा कि किसी विशेष धार्मिक परंपरा से जुड़े मंत्रों को अनिवार्य करना उचित नहीं माना जा सकता। भारत एक धर्मनिरपेक्ष और पंथनिरपेक्ष राष्ट्र है तथा सरकारी संस्थानों में किसी वैचारिक एजेंडे को लागू करना संविधान की भावना के अनुरूप नहीं है।
शिक्षा व्यवस्था को राजनीतिक प्रयोगशाला न बनाने की मांग
कांग्रेस ने कहा कि इस फैसले से समाज के एक बड़े वर्ग की भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं। पार्टी ने राज्य सरकार से आदेश पर पुनर्विचार करने की मांग करते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था को राजनीतिक या वैचारिक प्रयोगशाला नहीं बनाया जाना चाहिए।
क्या कहता है शिक्षा विभाग का आदेश?
स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 12 जून को जारी आदेश में सभी शासकीय स्कूलों में सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, दीप प्रज्ज्वलन, सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र और महापुरुषों की जीवनी के वाचन को अनिवार्य किया गया है।
इसके अलावा मध्याह्न भोजन के समय भोजन मंत्र तथा विद्यालय की छुट्टी से पहले राज्यगीत, गायत्री मंत्र और शांति मंत्र के पाठ के निर्देश दिए गए हैं।
आदेश को लेकर बढ़ सकती है राजनीतिक बहस
शिक्षा विभाग के इस आदेश को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। जहां कांग्रेस इसे लेकर सरकार पर सवाल उठा रही है, वहीं सरकार की ओर से अभी इस विवाद पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।



